डिजिटल डेस्क, सिडनी। भारतीय क्रिकेट टीम के अधिकारियों ने शिकायत की है कि सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) पर आस्ट्रेलिया के साथ खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन शनिवार को तेज गेंदबाज-जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज पर दर्शकों ने नस्लीय टिप्पणी की है। घटना सिडनी में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन यानी शनिवार को हुई।
तीसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद आईसीसी, स्टेडियम के सुरक्षा अधिकारी बुमराह और सिराज के साथ लंबी बातचीत करते हुए नजर आए और इस दौरान भारतीय टीम प्रबंधन के सदस्य भी उनके साथ थे। टीम के कप्तान अजिंक्य रहाणे भी सुरक्षा अधिकारियों से बातें करते हुए नजर आए। ऑस्ट्रेलियाई अखबार द डेली टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पता चला है कि भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि बुमराह और सिराज पर दर्शकों द्वारा बीते दो दिन से फब्तियां कसी जा रही हैं जो नस्लीय हैं। मैदान के रैंडविंक छोर की तरफ जहां सिराज फील्डिंग कर रहे थे वहां दर्शकों में से यह टिप्पणी की गई।
सिराज को मंकी यानी बंदर कहा गया
BCCI सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि सिराज जब बाउंड्री लाइन पर फील्डिंग कर रहे थे, तब उन्हें एक दर्शक ने मंकी यानी बंदर कहा। यह दर्शक सिडनी क्रिकेट ग्राउंड के स्टैंड्स में पूरे वक्त मौजूद था। इस सूत्र ने कहा- हमने इस बारे में ICC के मैच रेफरी डेविड बून के पास शिकायत दर्ज कराई है। आरोपी दर्शक नशे में था। डेविड बून ऑस्ट्रेलियाई टीम के पूर्व ओपनर रह चुके हैं। हालांकि, बुमराह पर किस तरह की नस्लीय टिप्पणी की गई, इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। जानकारी के मुताबिक, सिराज और बुमराह के साथ हुई घटना के बाद कप्तान अजिंक्य रहाणे और दूसरे सीनियर प्लेयर्स ने मीटिंग भी की। इस दौरान सिक्योरिटी ऑफिसर्स और अंपायर्स भी मौजूद थे।
सायमंड्स और हरभजन की 13 साल पुरानी कहानी
BCCI के सूत्र बताते हैं कि मोहम्मद सिराज को मंकी कहा गया। इस घटना ने 2007-08 की घटना याद दिला दी। तब टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई थी। सिडनी टेस्ट में सायमंड्स बैटिंग कर रहे थे। हरभजन सिंह से उनकी नोंक-झोंक चल रही थी। इस दौरान दोनों के बीच जुबानी जंग भी हुई। बाद में सायमंड्स ने आरोप लगाया कि भज्जी ने उन्हें मंकी कहा। इस घटना को ‘मंकीगेट’ कहा जाता है। ICC के नियमों के मुताबिक यह नस्लीय टिप्पणी थी। तब पूरी सीरीज ही खतरे में पड़ गई थी। मैच रेफरी के सामने सुनवाई हुई। हरभजन को क्लीन चिट मिल गई। इसके बावजूद यह मामला आज भी कभी-कभार उठाया ही जाता है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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