डिजिटल डेस्क ( भोपाल)। अपने पहले चार टेस्ट में दो दोहरे शतक और 54 के औसत से बर्थ-डे बॉय विनोद कांबली ने क्रिकेट कैरियर की धमाकेदार शुरआत की थी। 18 जनवरी 1972 को जन्में कांबली का आज 49वां बर्थ-डे है। 1993 में भारत के लिए अपना पहला टेस्ट मैच खेलने वाले कांबली ने 1995 के बाद से भारत के लिए कोई टेस्ट नहीं खेला। दरअसल, 1993 में उन्होंने जिम्बाब्वे और इंग्लैंड के खिलाफ दोहरे शतक लगाए थे, लेकिन इसके दो साल बाद उन्होंने वेस्ट इंडीज के खिलाफ छह पारियों में तीन पर खाता भी नहीं बना पाए थे। इसके बाद उनके लिए क्रिकेट में वापसी बहुत मुश्किल हो गई।
कांबली के पिता गणपत कांबली मेकैनिक थे और मुश्किल से 7 लोगों के परिवार का पालन-पोषण करते थे। सचिन के बचपन के दोस्त कांबली ने मुंबई की मशहूर कांगा लीग में उनके साथ ही डेब्यू किया था।
स्कूली छात्र के रूप में उन्होंने अपने साथी सचिन तेंदुलकर के साथ तीसरे विकेट के लिए 664 रन की साझेदारी की और यह जोड़ी क्रिकेट जगत में छा गई। इस मैच में कांबली ने 349 रन और सचिन ने 326 रन बनाए थे।
कहते हैं कि कांबली अपनी सफलता के बाद मिले स्टारडम को संभाल नहीं पाए। उनकी आदतों और व्यवहार के कारण टीम से बाहर होने के बाद 9 बार वापसी की थी, लेकिन वह एक भी बार अपनी जगह पक्की करने में कामयाब नहीं हो पाए। कांबली ने बाद में आरोप लगाया कि उनके कप्तान, टीम के साथी, चयनकर्ता और क्रिकेट बोर्ड की वजह से उनका करियर बर्बाद हुआ।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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